दशा काल
ज्योतिष सारथि जन्म के समय चंद्रमा की सूक्ष्म नक्षत्र-स्थिति से पूरा दशा वृक्ष बनाता है — विंशोत्तरी, योगिनी और त्रिभागी प्रणालियाँ, प्रत्येक महादशा से अंतर्दशा और प्रत्यंतर्दशा तक खुलने वाली। बीती और आगामी दशाएँ चीना में अलग-अलग छापी जा सकती हैं।
मुख्य बातें
- तीन प्रणालियाँ: विंशोत्तरी, योगिनी और त्रिभागी।
- तीन स्तर: महादशा, अंतर्दशा, प्रत्यंतर्दशा।
- जन्म-कालीन शेष चंद्रमा की सूक्ष्म नक्षत्र-स्थिति से।
- बीती और आगामी दशाएँ चीना PDF में अलग छापी जा सकती हैं।
- विंशोत्तरी दशा फ़्री प्लान में शामिल।
समयरेखा से क्या मिलता है
- विंशोत्तरी — 120 वर्ष का चंद्र-नक्षत्र चक्र, नेपाल और भारत में मुख्य समय-प्रणाली।
- योगिनी — 36 वर्ष का चक्र, समय पर दूसरी राय के रूप में।
- त्रिभागी — विंशोत्तरी का त्रि-भाग रूप।
- प्रत्येक काल की आरंभ-अंत तिथियों सहित प्रत्यंतर्दशा तक विस्तार।
- प्रीमियम में प्रति-काल फलादेश, अतः दशा केवल तिथि-सीमा नहीं, लिखित फल बनती है।
यहाँ जन्म-समय ही सब कुछ चलाता है
दशा क्रम वहीं से आरंभ होता है जहाँ जन्म के क्षण चंद्रमा अपने नक्षत्र में था। चंद्रमा एक नक्षत्र लगभग एक दिन में पार करता है, अतः एक घंटे की त्रुटि पहली महादशा के शेष को कई सप्ताह हिला देती है — और आगे की प्रत्येक दशा वही खिसकाव ले जाती है। जन्म-समय अनिश्चित हो तो दशा तिथियाँ उसी अनुपात में अनिश्चित हैं, और फलादेश में यह कहना ईमानदारी है।
गोचर के साथ दशा पढ़ना
दशा बताती है कौन ग्रह काल थामे है; गोचर बताता है वह ग्रह इस समय कहाँ है। साथ पढ़ने पर स्पष्ट होता है कि वही महादशा भिन्न वर्षों में भिन्न व्यवहार क्यों करती है। ऐप वर्तमान गोचर को लग्न कुंडली पर प्लॉट करता है, अतः दोनों दृश्य साथ जाँचे जा सकते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
कौन-सी दशा प्रणालियाँ शामिल हैं?
विंशोत्तरी, योगिनी और त्रिभागी — प्रत्येक महादशा, अंतर्दशा और प्रत्यंतर्दशा स्तरों सहित।
क्या दशा फ़्री प्लान में उपलब्ध है?
हाँ, दशा गणना फ़्री प्लान में शामिल है। विस्तृत दशा फलादेश प्रीमियम फ़ीचर है।
क्या केवल आगामी दशाएँ छाप सकते हैं?
हाँ। चीना PDF में बीती और आगामी दशाएँ अलग-अलग छापी जा सकती हैं, अतः यजमान को केवल शेष काल मिलते हैं।